Friday, March 1, 2013

काई पो चे पैसा वसूल फिल्म




राय --- चेतन भगत के नोवेल थ्री मिस्टेक्स ऑफ़ माय लाइफ पर आधारित काई पो चे पैसा वसूल फिल्म तो है! दोस्ती,राजनीति और असल ज़िन्दगी की हकीकत से रूब्रो करवाती यह फिल्म हर वर्ग के लिए है! क्यूंकि कही न कही समाज का हर वर्ग इस से जुदा हुआ है!  हालाँकि नोवेल पढने मैं और फिल्म देखने मैं बहुत सारी  बाते  आपको अटपटी लगयेगी, परन्तु फिर भी फिल्म मैं जितना दो घंटो मैं दिखाया जा सकता था उतना दिखाया है! हाँ अगर नोवेल की तरह फिल्म  मैं भी अली के ऑस्ट्रेलिया जाने के दृश्यों का दिखाया जाता तो शायद और भी अच्छा  होता ! फिल्म मैं नोवेल के मुख्य पत्रों को भलीभांति परस्तुत करने की कोशिश की गयी है, जोकि काफी हद तक उचित भी रही! हालाँकि जिन्होंने नोवेल पढ़ा है उनके लिए यह उतनी तन्मयता से देखने वाली फिल्म नहीं है जितनी तन्मयता से नोवेल पढ़ा गया होगा! परन्तु इसे एक पैसा वसूल फिल्म की कतार मैं रखा जा सकता है!
                  
        जहा तक अभिषेक कपूर के निर्देशन क्र बात है उन्होंने सही और सटीक काम दिखाया है ! नोवेल मैं छुपे सोहार्द के सन्देश को बखूबी प्रदर्शित किया है! नोवेल कस जिन तथ्यों को अभिषेक द्वारा प्रदर्शित नहीं किया गया उन्हों ने फिल्म को कही से बी अधुरा साबित नहीं किया! हलाकि नोवेल पढ़े हुए दर्शको के लिए अंत अलग रहा परन्तु विषये वास्तु के अनुसार ठीक और सटीक है! फिल्म मैं संगीत भी काफी सटीक और कर्णप्रिय है!   फिल्म हलाकि एक ही रफ़्तार से चलती है पैर फिर भी उबाऊ बिलकुल बी नहीं लगती! अगर फिल्म मैं विद्या आज की लड़की को दिखाती है तो तीनो दोस्त आज के युवा पीढ़ी को जो युवा अवस्था मैं पाऊँ रखते ही बड़े बड़े सपने देखते है और उन्हें पूरा करने के लिए या तो जी जान लगा देते है या फिर आपने जोश मैं होश खो देते है! जिसके बाद उनके पास ओमी की तरह पछताने क लिए कुछ बी नहीं बचता!                                               
                                 एक और बात जो फिल्म मैं चे एक छोटा सा दृश्ये ही है परन्तु गंभीर विषये को दिखता है! वो है स्चूल्स मैं खेलो के परती अनदेखी वाला विय्व्हार! हलाकि खेल हमें साच मैं ज़िन्दगी के अहम् सबक देता है फिर भी हमारे देश मैं अभी भी इसके लिए बहुत कुछ होना बाकि है! हलाकि क्रिकेट तो एक पार्टिक मात्र है असल मैं हर खेल के लिए युवाओ को पररित करना जरुरी है! अगर ईशान के शब्दों मैं देखे तो खेल से ही बहुत साडी खुभिया बचू मैं आ सकती है! खेल भी पढाई मैं अवल आने जितना ही मुश्किल और म्हणत वाला काम है!

निर्देशक -- अभिषेक कपूर लेखक - चेतन भगत (नोवेल),अभिषेक कपूर सितारे --- अमित साध , सुशांत सिंह राजपूत , राजकुमार यादव

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