Never keep your feelings to yourself, Express them because Life is such a Big platform given by GOD to all his characters. So do your duty in the Best way!!!!!!!!!!!!!!
Monday, February 25, 2013
Sunday, July 15, 2012
Mera Ehssas
Aaj mudaton ke baad dil ko sakun aaya hai,
Bhule se hi sahi per Dil main tera naam aya hai !
log kehte hai hum bepervah ho gaye hai,
per kya bataye unhe k hum aapne se juda ho gaye hai,
manzilon ki tamana thi kabhi, per ab raaston pe bhatakte,
teri aashiqi ko shiddat se ab mahsus kiya hai,
isliye tere jane ke baad tere liye tadapte hai !
Kabhi Kabhi dil chahta hai pane ko tujhe,
per tuta patta shakh se kaab jud paata hai!
yehi dard hai jo kabhi tumne bayaan kiya tha,
per na jane kyun mere dil ne sunne se manna kiya tha!
Tujhe yaad karke dil aaj sakun paata hai,
per na janne kyun chah kar bhi yeh dil tujh he bulata hai!!!!!!!!!!!
Bhule se hi sahi per Dil main tera naam aya hai !
log kehte hai hum bepervah ho gaye hai,
per kya bataye unhe k hum aapne se juda ho gaye hai,
manzilon ki tamana thi kabhi, per ab raaston pe bhatakte,
teri aashiqi ko shiddat se ab mahsus kiya hai,
isliye tere jane ke baad tere liye tadapte hai !
Kabhi Kabhi dil chahta hai pane ko tujhe,
per tuta patta shakh se kaab jud paata hai!
yehi dard hai jo kabhi tumne bayaan kiya tha,
per na jane kyun mere dil ne sunne se manna kiya tha!
Tujhe yaad karke dil aaj sakun paata hai,
per na janne kyun chah kar bhi yeh dil tujh he bulata hai!!!!!!!!!!!
Friday, July 13, 2012
dil se.........
Dil na jane kyun udaas hota hai,
jab koi aapna paas nahi hota hai,
hamne to bahut koshis ki,
unhe aapne pass rakhne ki,
per parindo ka kab koi thikana hota hai!
Ghar banate hai vo kuch pal rukne k liye,
pardesi hai vo ,
unhe to har haal main udna hota hai.............
jab koi aapna paas nahi hota hai,
hamne to bahut koshis ki,
unhe aapne pass rakhne ki,
per parindo ka kab koi thikana hota hai!
Ghar banate hai vo kuch pal rukne k liye,
pardesi hai vo ,
unhe to har haal main udna hota hai.............
Reservation Must Be Abolished!!!!!!!
Reservation! A word that shows an ease for those who are helpless. Because it makes easy for some people to gain sympathy of others. But Do we think that this is the main reason behind our country is not becoming a developed country. Because We just go for caste why not we go for abilities? Here i Am not saying they are not capable but ths is the one of the thing that is becoming a hot case for the selfish politicians. those who are making this an issue for election and even for the fulfillment of their evil deeds.
We have seen many cases that an meritorious student has not got seat in government college just because is down from the merit cut list of the college. But the minorities or the reserved category student got the admission even after less no.'s. Why. Here the question is Why a 60 or 68 % general category student does not get admission and the 45 or 50 % category student get entertained.
Even Why we go for reservation on gender base. If we believe men and women are equal then let them grab the opportunities with their hard work and capabilities.that must be follow on each and every level for every person..
Saturday, March 24, 2012
एक कहानी -दिल की जुबानी
,
कभी कभी हम कुछ ऐसा देख लेते है जो हमें अन्दर तक कचोट देता है! ऐसा ही कुछ नन्ही सेसे सीमू के साथ हुआ! सीमू मेरी पहली स्टुडेंट, जब मैंने अपना जब खर्च निकलने क लिए घर पैर पढ़ाना शुरू किया था! बहुत मासूम सी सीमू अपने मुह बोले भाई हीरा से बहुत प्यार करती थी! मुझे आज भी याद है कभी कभी उसकी वजह से अपनी माँ से मार भी खा लिया करती! गलती हीरा की होती और पिटती बेचारी सीमू!
हीरा सीमू से कुछ चार पांच साल बड़ा होगा !! पढने मैं वो सीमू से अच्छा था! परन्तु उसे जूठ बोलने और रुपये चुराने की आदत थी! क्यूंकि उसके शौक बहुत बड़े बड़े थे ! बस फिर छोटी सी वो बच्ची अपने भाई के कहने पैर कुछ बी करने को तैयार रहती एक दिन ऐसे ही खेलते खेलते वो मेरे पास आई और बोली आज भैया मुझे घुमाने ले जा रहे है पैर उन्हों ने मुझे किसी से बताने को मन किया है अपने दोस्तों को भी ले जा रहे है हम सब उनके स्कूल के पीछे वाले ग्राउंड मैं खलेगे मैंने उसे पहले इतना खुश कभी नहीं देखा था मैं मन ही मन सोचने लगी आखिर कब तक यह मासूम यूँ ही अपने इन दूर के रिश्तेदारों क रहमो करम पैर जी सकेगी छोटी छोटी बात पैर हसने वाली सीमू न जाने कब तक अपने इस भाई हीरा के कारन पिटती रहेगी उस शाम काफीबर्रिश हो रहीथी कितनी दिएर तक मैं हीरा और सीमू की राह देखती रही वो पढने आ जाये पैर उस दिन वो नहीं आये मैंने सोचा शायद खेल कर थक गए होगये और बर्रिश भी तो है चलो कल आजायेंगे लेकिन वो अगले दिन बी नहीं आये ऐसा दो तीन दिन हुआ तो मुझे भी चिंता होने लगी फिर मैं उनके घर पूछने गई तो पता चला की सीमू तो बीमार है अस्पताल मैं है मुझे उसे देखने का बहुत मान था और चिंता बी की आखिर ऐसा क्या हुआ क वो इतना बीमार हो गई अस्पताल जाने पैर देखा क उसके पास हीरा की माँ है जब मैंने सीमू से बात करने की कोशिश की तो हीरा की माँ ने बीच मैं ही टोक दिया कहा मैडम जी बच्ची की तबियत ठीक नहीं सोने दीजिये घर आएगी तो बात करियेगा मैं कुछ परेशान हो गई और वह से उठ आई पैर सर्री रात कुछ मान मैं चुभता रहा न जाने क्यूँ लगा की उस बाची के साथ कुछ तो है जो गलत हुआ है मैं फिर रोज़ इस आस मैं अस्पताल जाने लगी की शायद कभी उस से बात हो जाये पैर वो मौका मुझे नहीं मिला तो दो दिन बाद मैंने वह की एक नर्स से सीमू के बारे मे पूछ ही लिया उस नर्स ने जो बताया उसे सुन कर एक बार तो जैसे मेरी रूह काप गयी उस दिन खेल के बहाने उसके भाई और दोस्तों ने उस बच्ची बेचारी को ही आपना खेल बना लिया था इस बात को छुपाने और के दर से ही हीरा के माँ बाप उस बची पैर इतना पैसा लगा रहे थे शहर मैं अच रुतबा होने के कारन उस बेचारी की आवाज़ उनके घर से बहार नहीं जा पाई लेकिन आज तक बी मैं उस लड़की को दोबारा अपने आस पास नहीं देखा जब की हीरा आज बी ख़ुशी से अपना जीवन जी रहा है दुःख है मुझे तो सिर्फ इस बात का की यह सब देख के भी मैंने उस समय उसके लिए कुछ नहीं किया अगर करती तो शायद दोषी यूँ हस्त मुस्कुराता न गुमता और वो मासूम हँसी आज भी मुझे आस पास सुन जाती
कभी कभी हम कुछ ऐसा देख लेते है जो हमें अन्दर तक कचोट देता है! ऐसा ही कुछ नन्ही सेसे सीमू के साथ हुआ! सीमू मेरी पहली स्टुडेंट, जब मैंने अपना जब खर्च निकलने क लिए घर पैर पढ़ाना शुरू किया था! बहुत मासूम सी सीमू अपने मुह बोले भाई हीरा से बहुत प्यार करती थी! मुझे आज भी याद है कभी कभी उसकी वजह से अपनी माँ से मार भी खा लिया करती! गलती हीरा की होती और पिटती बेचारी सीमू!
हीरा सीमू से कुछ चार पांच साल बड़ा होगा !! पढने मैं वो सीमू से अच्छा था! परन्तु उसे जूठ बोलने और रुपये चुराने की आदत थी! क्यूंकि उसके शौक बहुत बड़े बड़े थे ! बस फिर छोटी सी वो बच्ची अपने भाई के कहने पैर कुछ बी करने को तैयार रहती एक दिन ऐसे ही खेलते खेलते वो मेरे पास आई और बोली आज भैया मुझे घुमाने ले जा रहे है पैर उन्हों ने मुझे किसी से बताने को मन किया है अपने दोस्तों को भी ले जा रहे है हम सब उनके स्कूल के पीछे वाले ग्राउंड मैं खलेगे मैंने उसे पहले इतना खुश कभी नहीं देखा था मैं मन ही मन सोचने लगी आखिर कब तक यह मासूम यूँ ही अपने इन दूर के रिश्तेदारों क रहमो करम पैर जी सकेगी छोटी छोटी बात पैर हसने वाली सीमू न जाने कब तक अपने इस भाई हीरा के कारन पिटती रहेगी उस शाम काफीबर्रिश हो रहीथी कितनी दिएर तक मैं हीरा और सीमू की राह देखती रही वो पढने आ जाये पैर उस दिन वो नहीं आये मैंने सोचा शायद खेल कर थक गए होगये और बर्रिश भी तो है चलो कल आजायेंगे लेकिन वो अगले दिन बी नहीं आये ऐसा दो तीन दिन हुआ तो मुझे भी चिंता होने लगी फिर मैं उनके घर पूछने गई तो पता चला की सीमू तो बीमार है अस्पताल मैं है मुझे उसे देखने का बहुत मान था और चिंता बी की आखिर ऐसा क्या हुआ क वो इतना बीमार हो गई अस्पताल जाने पैर देखा क उसके पास हीरा की माँ है जब मैंने सीमू से बात करने की कोशिश की तो हीरा की माँ ने बीच मैं ही टोक दिया कहा मैडम जी बच्ची की तबियत ठीक नहीं सोने दीजिये घर आएगी तो बात करियेगा मैं कुछ परेशान हो गई और वह से उठ आई पैर सर्री रात कुछ मान मैं चुभता रहा न जाने क्यूँ लगा की उस बाची के साथ कुछ तो है जो गलत हुआ है मैं फिर रोज़ इस आस मैं अस्पताल जाने लगी की शायद कभी उस से बात हो जाये पैर वो मौका मुझे नहीं मिला तो दो दिन बाद मैंने वह की एक नर्स से सीमू के बारे मे पूछ ही लिया उस नर्स ने जो बताया उसे सुन कर एक बार तो जैसे मेरी रूह काप गयी उस दिन खेल के बहाने उसके भाई और दोस्तों ने उस बच्ची बेचारी को ही आपना खेल बना लिया था इस बात को छुपाने और के दर से ही हीरा के माँ बाप उस बची पैर इतना पैसा लगा रहे थे शहर मैं अच रुतबा होने के कारन उस बेचारी की आवाज़ उनके घर से बहार नहीं जा पाई लेकिन आज तक बी मैं उस लड़की को दोबारा अपने आस पास नहीं देखा जब की हीरा आज बी ख़ुशी से अपना जीवन जी रहा है दुःख है मुझे तो सिर्फ इस बात का की यह सब देख के भी मैंने उस समय उसके लिए कुछ नहीं किया अगर करती तो शायद दोषी यूँ हस्त मुस्कुराता न गुमता और वो मासूम हँसी आज भी मुझे आस पास सुन जाती
हादसा
जिंदगी कभी कभी एक हादसा लगती है,
क्या कहें न जाने क्यूँ हर वक़्त कुछ कमी लगती है
भूलते है हम हर जाने वाले को
फिर भी न जाने क्यूँ,
कुछ कमी सी हर वक़्त खलती है
अरमान दिल मैं बहुत है मगर
न जाने क्यूँ फिर भी मंजिल धुंदली सी लगती है
हाथ मिलाते है अजनबी जब
एक सिहरन सी बदन मैं उठती है
हर हाथ कातिल लगता है
हर मुस्कान झूटी लगती है
जब से तुम दूर हुए हो हर ख़ुशी बेमानी लगती है,
लोग बहुत है पास मेरे
पर तेरी कमी खलती है
झूठ कहू या सच कहू ,
तेरे दूर होने की बात से,
आज भी दिल मैं एक टीस सी उठती है!
क्या कहें न जाने क्यूँ हर वक़्त कुछ कमी लगती है
भूलते है हम हर जाने वाले को
फिर भी न जाने क्यूँ,
कुछ कमी सी हर वक़्त खलती है
अरमान दिल मैं बहुत है मगर
न जाने क्यूँ फिर भी मंजिल धुंदली सी लगती है
हाथ मिलाते है अजनबी जब
एक सिहरन सी बदन मैं उठती है
हर हाथ कातिल लगता है
हर मुस्कान झूटी लगती है
जब से तुम दूर हुए हो हर ख़ुशी बेमानी लगती है,
लोग बहुत है पास मेरे
पर तेरी कमी खलती है
झूठ कहू या सच कहू ,
तेरे दूर होने की बात से,
आज भी दिल मैं एक टीस सी उठती है!
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